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सोमला गांव ने तोड़ी तेरहवीं की कुप्रथा, शिक्षा दान की नई परम्परा शुरू, मृत्युभोज का पैसा अब बच्चों की पढ़ाई पर होगा खर्च – कुशवाहा महापंचायत

FB IMG 30854465998748327022IMG 20260620 WA0166सागर। वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी,8225072664* सुरखी विधानसभा के ग्राम सोमला में कुशवाहा समाज ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गांव में एक परिवार में पिता के स्वर्गवास पर तेरहवीं भोज न करने का निर्णय लिया गया। अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री एडवोकेट अर्जुन पटेल, कुशवाहा महापंचायत के जिला अध्यक्ष चौधरी जयराम पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी मोहन कुशवाहा ठेकेदार एवं सागर ग्रामीण अध्यक्ष जगदीश पटेल सोमला ने दुखित परिवार के बीच पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की और समाजजनों की उपस्थिति में मृत्युभोज बंद करने का आग्रह किया।चौधरी जयराम पटेल ने कहा कि
जिस पिता ने जिंदगी भर मेहनत करके 2 पैसे जोड़े, वो पैसा उसके बच्चों की पढ़ाई में लगना चाहिए या 500 लोगों की पूड़ी-सब्जी में? एक तेरहवीं में 1.5 से 3 लाख खर्च होते हैं। इससे बेटे की http://B.Ed हो सकती है, बेटी की शादी के लिए FD हो सकती है, ट्रैक्टर की डाउन पेमेंट हो सकती है। पर हम कर्जा लेकर भोज करते हैं। 13 दिन बाद घर में रोना भी है और सिर पर कर्जा भी। ये कौन सा धर्म है जो रोते हुए परिवार को और रुलाए?गरुड़ पुराण में पिंडदान और ब्राह्मण भोजन लिखा है। कहां लिखा है कि पूरा गांव जिमाओ, 11 मिठाई बनाओ? भगवान राम ने भी पूरे अयोध्या को नहीं जिमाया था।”सोमला गांव का नया नियम:सादगी से श्राद्ध*: घर के 10-15 लोग, पंडित जी, कन्या भोज और नजदीकी रिश्तेदार,आज सोमला शुरू करेगा तो कल पूरा सुरखी मानेगा, परसों पूरा सागर मानेगा। रोते हुए परिवार की रोटी छीनना पाप है, सहारा देना पुण्य है”।उपस्थित सभी कुशवाहा बंधुओं ने हाथ उठाकर तेरहवीं प्रथा बंद करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी।

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